रविवार, 15 मई 2011

कहाँ गया इस देश का आम आदमी

बड़ा अफ़सोस हे इस देश का आम आदमी आज़ादी के ६२ वर्षो बाद भी  ठगा सा रह गया हे//इस   बेचारे आम आदमी के लिए तो       रोटी, कपडा और  मकान तो  मानो  जैसे धुर्व तारे के सामान हो गया हे /    वाह  रे भ्र्स्थचारियो ,कमाल कर  दिया ,रोटी कपड़ा मकान तो छीन लिया अब  हवा , पानी , सांसे भी छिनने की बारी आ गयी हे //आजादी के पूर्व व् आजादी के बाद गाँधी,नेहरु,पटेल ,जयप्रकाश ,आजाद ने बड़े बड़े सपने दिखाए थे  // सभी धरे के धरे रह गये / पिछले ६२ वर्षो में हुकुरनामो    ने आम आदमी को बिचारा बना कर  रख दिया,l चुनाव के समय आम आदमी की मज़बूरी का फायदा उठा कर उसे कुछ दारू की  बोतल,व्  चंद रूपये,का लालच दे कर ठग दिया// ,क्या काम का कुर्सी पर बैठने के त्याग का दिखावा'करना  l,और तो और किस काम का दुनिया के सर्वोत्तम अर्थ के शास्त्री का  देश के बड़े  पद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान होना ,l   व्यथा :-/इस  देश के ,किसानो की  आत्महत्ये , अभी रुकी ही नहीं की महंगाई ने मुंह फाड़ दिया,/ देश के इन हुकुरनामो   ने विदेशियो को खुश करने के लिए आम आदमी की कमाई पर महंगे वतानाकुलित कमरों में कुंडली मार कर विदेशी एजेंट  बन कर किसानो की जमींन  ह्त्याने की दुष्कर्म निति  बना डाली/अब फसल की जगह मौल बनेंगे और किसानो पर गोली, लाठी,लाठी,डंडासब चलेंगा/  खाद्य पदार्थ अब विदेशो से आएंगे//     विकास इसे कहा कहा    हे इन हुकरनामो  ने /अब  तो इस देश में दूध ३५, पानी १५,और पेट्रोल ७१ लीटर के हिसाब से आम आदमी को मिलेंगा लेना हो तो लो नहीं तो जाकर आत्म हत्या करो ///अब तो आम आदमी ने आपस में सवांद भी साधना  शुरू कर दिया हे की भाई बच्चे पैदा मत करो नहीं तो आने वाली संताने माँ बाप से सवाल कर के कोसेंगी की अपने मजे के लिए हमें इन भर्स्टचारियो   के देश मेंकहा जन्म दे दीया  इससे तो हम अलिएंस    ही रहते / अब     आप ही सोचे के बताये कहा गया  इस देश का आम आदमी और कहा हेई ,-----जरा सोचे -----------सोचे और मंथन करे ,चिन्तन करे ----------------मिला क्या जवाब ------------फिर सोचे -------------कही न कही मिल जायेंगा ---------------,  धन्यवाद  ,चन्दन गोस्वामी ९९७००५९५०५

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